साथ चलने का दिल मे न हो हौसला
साथ चलने का दिल मे न हो हौसला
रास्तों के न चर्चे चलाया करो
प्रेम कर न सको गर कभी प्रेम से
सामने आके मत मुस्कुराया करो।।
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तुम हो दरिया, बहोगे अभी दूर तक
बस्तियां भी उजड़ जाएंगी राह में
हम समंदर हैं बैठे रहेंगे सदा
राह तकते रहेंगे तेरी चाह में
जब हो बारिश तो यूँ ही उमड़ती हुई
मेरी लहरों में आकर समाया करो।।
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साथ चलने का दिल मे न हो हौसला
रास्तों के न चर्चे चलाया करो
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यूँ चलोगे जो बनकर के तूफां अगर
सामने जाने क्या क्या बिखर जाएगा
मेरा नाजुक सा ये प्रेम का घोंसला
एक ही झोंके में टूट गिर जाएगा
गिर पड़ें बिजलियाँ, पस्त हो हौसला
ऐसा जलवा हमें मत दिखाया करो।।
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साथ चलने का दिल मे न हो हौसला
रास्तों के न चर्चे चलाया करो
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जब तपिश में तुम आ न सको छाँव बन
आग बनकर मुझे और जलाओ नही
रात की झीनी चादर मैं जब ओढ़ लूं
चाँदनी बन मुझे आजमाओ नहीं
बनके पुरवा लहर सी लचकती हुई
मुझको छूकर न यूँ तुम रिझाया करो।।
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साथ चलने का दिल मे न हो हौसला
रास्तों के न चर्चे चलाया करो
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मेरे दिल का चमन है न रौंदों इसे
फूल अरमान के सब कुचल जाएंगे
मेरे सपनों के मासूम पौधे सभी
एक सावन से पहले मसल जाएंगे
गर सजा न सको प्यार से केश पर
तोड़कर यूँ न कलियों को लाया करो।।
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साथ चलने का दिल मे न हो हौसला
रास्तों के न चर्चे चलाया करो
०००
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