तिरंगा
तिरंगा
तन तिरंगा मन तिरंगा और ये जीवन तिरंगा,
आज है घर घर तिरंगा । आज है हर घर तिरंगा ।
ये तिरंगा देश के इतिहास का परिधान है
ये तिरंगा विश्व भर मे शान्ति का संधान है
ये तिरंगा हर एक भारतवासियों की शान है
इस तिरंगे में बसी हम सब की आनोबान है
ये तिरंगा देश की हर सुबह है हर शाम है
इसके कण कण में बसा बलदानियों का नाम है ।
आओ हम सब इस तिरंगे को नमन कर लें
अपनी सांसों मे हम उनका आचमन कर लें
जिन्होंने बलिदान करके सांस अपनी
देश को स्वातन्त्र्य की सांसें दिलाया
जो चढ़े फाँसी, किया जीवन समर्पण
राष्ट्र में स्वराज्य की वीणा बजाया ।
जिनके स्वर्णिम स्वप्न की रक्षा में अब भी
देश के प्रहरी सदा क्षण - क्षण सजग हैं
चहुँ दिशा सीमाओं पर पावन धरा के
प्राण को हाथों में लेकर के अडिग हैं
उनके पावन भूमि की दुनिया मे दस्तक
है नमन करता उन्हें हर एक मस्तक ।
उनके पावन लक्ष्य का सत्कार करने
और उनके स्वप्न को साकार करने
इस तिरंगे को लिये हम हाथ मे बढ़ते रहेंगे
तिरंगे के शाख में ऊँचाईयाँ चढ़ते रहेंगे
ये तिरंगा विश्व का श्रेष्ठतम जनतंत्र है
ये तिरंगा अनेकता में एकता का मंत्र है
ये तिरंगा मात्र एक ध्वज ही नहीं एक देश है
ये तिरंगा शान्ति और सामर्थ्य का संदेश है
ये तिरंगा संस्कृति है, ज्ञान है, विज्ञान है
ये तिरंगा पूज्य भारतभूमि, हिंदुस्तान है
ये तिरंगा माँ की ममता है, बहन की आन है
ये तिरंगा पिता के होंठों की भी मुस्कान है
ये तिरंगा वेद ग्रंथों का हर इक श्लोक है
ये तिरंगा त्यागियों के त्याग का आलोक है
ये तिरंगा नदियों के संगम का लौकिक रूप है
ये तिरंगा प्रकृति के शैशव की मोहक धूप है
ये तिरँगा हम सभी के ही गले का हार है
ये तिरंगा देश का सबसे बड़ा त्योहार है।
आज हम प्रण लें, "रखेंगे मान और सम्मान इसका"
तन से, मन से और धन से रखेंगे अभिमान इसका
जिस तिरंगे के रंगों में राष्ट्र का है भाल रंगा
आज है हर घर तिरंगा । आज है घर घर तिरंगा ।
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डॉ० उदय प्रताप सिंह
एसोसिएट प्रोफेसर,
गणित विभाग, एच० बी० टी० यू० कानपुर

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