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Showing posts from October, 2018

मन उदास है

क्या बोलूँ अब मन उदास है? खारा जल है, अमिट प्यास है। क्या बोलूँ अब मन उदास है? ००० भटका राह, काँच सा चटका, जीवन राग-द्वेष में अटका, सम्बन्धों को देकर झटका, वाह-वाह में हुआ दास है। क...

क्या लिख दूँ मैं? मन अशान्त है।

क्या लिख दूँ मैं ? मन अशान्त है ।। द्वेष ग्रसित मानव जंगल मे अर्ध दृश्य चेहरों के दल में इकलौतापन ही नितान्त है। क्या लिख दूँ मैं ? मन अशान्त है ।। प्रगति पंथ अत्यंत क्षीण है ज...

साथ चलने का दिल मे न हो हौसला

साथ चलने का दिल मे न हो हौसला रास्तों के न चर्चे चलाया करो प्रेम कर न सको गर कभी प्रेम से सामने आके मत मुस्कुराया करो।। ००० तुम हो दरिया, बहोगे अभी दूर तक बस्तियां भी उजड़ जाएं...