मन उदास है
क्या बोलूँ अब मन उदास है?
खारा जल है, अमिट प्यास है।
क्या बोलूँ अब मन उदास है?
०००
भटका राह, काँच सा चटका,
जीवन राग-द्वेष में अटका,
सम्बन्धों को देकर झटका,
वाह-वाह में हुआ दास है।
क्या बोलूँ अब मन उदास है?
०००
झूठे सपनों का डेरा है,
चिंताओं ने अब घेरा है,
सब चतुराई का फेरा है,
अब सन्नाटा आस-पास है।
क्या बोलूँ अब मन उदास है?
०००
कैसा नियम? कौन अनुशासन?
अब जब डोला अपना आसन,
छाया मौन, भुलाया भाषण,
विचलित वाणी का विलास है।
क्या बोलूँ अब मन उदास है?
०००
जो बीती अब बात भुलानी,
का वर्षा जब कृषी सुखानी,
जो रख ले आंखों का पानी,
उस भविष्य से नई आस है।
क्या बोलूँ अब मन उदास है?
---
डॉ उदय प्रताप सिंह "अर्णव"
Comments
Post a Comment