अतीत की स्मृति
एक कहानी बीत गयी
और एक कहानी बाकी है
यादों के गुलदस्ते की
एक् याद सुहानी बाकी है
आज मुझे मत झकझोरो,
सपनो में डूबा रहने दो
अभी अतीत के भवसागर में
नाव चलानी बाकी है
बेला की कोमल पाँखों पर
घाव दिए थे जो तुमने
अब तक हृदयबद्ध होकर
वो अमिट निशानी बाकी है
मन - मयूर कितना हर्षित है
तुम्हें बताएं प्रिय कैसे
जो रह गयी अनकही
अब भी बात पुरानी बाकी है
प्रणय परिस्थितियों से करके
जीवन हुआ नियंत्रित पर
स्मृति-शेष है व्यथा अभी
उसकी मनमानी बाकी है
कैसे झुठला दूं खुद से,
कैसे कर लूँ बोझिल पलकें
जब तक आंखों में तेरी
आँखों का पानी बाकी है।
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डॉ उदय प्रताप सिंह 'अर्णव'
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