रक्षाबन्धन

आ गया राखी का त्योहार!
सँजोये रेशम सा कोमल अमिट भाई-बहनों का प्यार ।
आ गया राखी का त्योहार!

बहन  की रक्षा का ये पर्व
भाइयों के जीवन का गर्व
हृदय  की  गहराई से नेह
समेटे    नैसर्गिक     स्नेह
समूची धरती पर अद्भुत कहाँ होगा ऐसा संसार ।
आ गया राखी का त्योहार!

जुड़े जीवन की  सारी आस
बंधे  जब  रक्षा  का विश्वास
सुगन्धित  है  जो चारों ओर
नहीं बस रेशम की एक डोर
वरन ये है मानवता के पवित्र रिश्ते का भी आधार ।
आ गया राखी का त्योहार!

जुड़ा है  ग्रंथों का इतिहास
बुझाई थी भक्ति की प्यास
बालि  की नारायण ने जब
मात् लक्ष्मी ने आखिर तब
बालि का करके कर-बंधन लिया नारायण का उपहार।
आ गया राखी का त्योहार!

द्रौपदी   ने  बांधा  बंधन
प्रभु  श्रीकृष्ण बने बीरन
बनाई  भाई की पहचान
बचाया नारी का सम्मान
उसी धागे में बंधकर किया अनेकों पापों का संहार ।
आ गया राखी का त्योहार!

पवित्रता की भर पावन गन्ध
मृत्यु  तक  रक्षा  की सौगन्ध
पिरो   कच्चे   धागे  में  प्यार
बहन  ने  बांध  दिया  संसार
माँग ली भाई से ये वचन करे दुर्भावों का परिहार ।
आ गया राखी का त्योहार!

सपथ  दे  रही  बहन प्यारी
किसी की बहन है हर नारी
यही  सच्चे  भाई  का मान
रखो  हर  नारी का सम्मान
सुरक्षित होकर जब बहने कर सकें भय उन्मुक्त विहार ।
आ गया राखी का त्योहार!

मिटें अब जीवन से व्यभिचार
शुद्ध हों नित आचार - विचार
मापदण्डों    से   हटे   विकार
सुनें     नारी    के    हृदयोद्गार
बहन का भाई से आग्रह, मिले हर नारी को अधिकार ।
आ गया राखी का त्योहार!

सृष्टि का कहे यही कण-कण
आज  आओ  हम  ले लें प्रण
नहीं  कन्या  है  जीवन   भार
अपूर्ण है उसके बिन परिवार
यही होगा हर भाई का बहन को प्यार और मनुहार ।
आ गया राखी का त्योहार!
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डॉ उदय प्रताप सिंह "अर्णव"

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