मधु-स्मृति के मधुर-विषाद

जब जब परछाई देखोगे नाम मेरा होठों पर होगा ।
जब भी तुम तन्हा बैठोगे नाम मेरा होठों पर होगा ।
जब बचपन को याद करोगे
अपनेपन को याद करोगे
तुलसी का वो पेड़ पुराना
बागीचे का सैर सुहाना
लुका छिपी भी याद आएगी
आंख तुम्हारी भर जाएगी
पास नही होगा तब कोई
किससे फिर फरियाद करोगे।
जब बादल उड़ता देखोगे नाम मेरा होठों पर होगा ।
जब भी तुम तन्हा बैठोगे नाम मेरा होठों पर होगा ।
जब आमों पर बौर लगेंगे
इंद्रधनुष सिरमौर लगेंगे
पुरवा झोंके जब लहकेंगी
बेलपत्र जब जब महकेंगी
जब झूले डालों पर होंगे
पुष्प गुच्छ बालों पर होंगे
हांथों में मेहंदी रचकर करके
बीते दिन को याद करोगे ।
जब गुलमोहर को देखोगे नाम मेरा होठों पर होगा ।
जब भी तुम तन्हा बैठोगे नाम मेरा होठों पर होगा ।
जब पतझड़ में पात झरेंगे
चिलबिल में जब बीज फरेंगे
जब सूरज गुनगुन सा होगा
घर में कभी सगुन सा होगा
जब बच्चे हंस देंगे खिलखिल
दीवाली होगी जब झिलमिल
मेरे गीतों की गुनगुन में
कम अपना अवसाद करोगे ।
जब संध्या ढलते देखोगे नाम मेरा होठों पर होगा ।
जब भी तुम तन्हा बैठोगे नाम मेरा होठों पर होगा ।
जब कोयल कूंजेगी भर भर
जब पीपल गूंजेगा हर-हर
जब जब आंधी होगी सूँ - सूँ
जब दोपहर करेगी धूँ - धूँ
सन्नाटा जब होगा हूँ - हूँ
जब ध्वनि हो जाएगी गूँ - गूँ
उड़ते तिनकों की झन-झन का
किस स्वर में प्रतिवाद करोगे ।
जब पत्ते उड़ते देखोगे नाम मेरा होठों पर होगा ।
जब भी तुम तन्हा बैठोगे नाम मेरा होठों पर होगा ।
जब बारिश होगी छन-छन-छन
छा जाएगी घोर घटा - घन
पुलकित होगा जब ये तन मन
महक उठेगा जब जब उपवन
तृप्त न होगा जब प्यासा मन
दुर्लभ हो जाएगा जीवन
आर्त करुण उच्छ्वासों में बस
अन्तस् में अनुनाद करोगे।
जब जामुन फलता देखोगे नाम मेरा होठों पर होगा।
जब भी तुम तन्हा बैठोगे नाम मेरा होठों पर होगा।
जब बच्चे स्कूल चलेंगे
ठुमक - ठुमक घर से निकलेंगे
जब रस्तों पर धूल उड़ेगी
छत पर जब चिड़िया उमड़ेंगी
जब झींगुर गाएंगे झन - झन
जब विह्वल होगा कोमल मन
"मधु-स्मृति" में हाय प्रिये तुम
उर में "मधुर - विषाद" भरोगे!
जब झीलों का जल देखोगे नाम मेरा होठों पर होगा ।
जब भी तुम तन्हा बैठोगे नाम मेरा होठों पर होगा ।

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डॉ उदय प्रताप सिंह "अर्णव"

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