मुझको इतना प्यार न देना

मुझको इतना प्यार न देना
खुशियों का अम्बार न देना।
मस्तक झुका सकूँ न पल भर
प्रेम का इतना भार न देना।
पलकें बोझिल सजल रहें
उन यादों की भरमार न देना।
जिन्हें न तुम साकार करो
उन सपनों का संसार न देना।
रहूं एकला कभी जगत में
मुझको ये परिहार न देना।
सुर-लय बिखर चलें इक क्षण
तुम इतना भी झनकार न देना।
मुझको इतना प्यार न देना
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डॉ उदय प्रताप सिंह 'अर्णव'

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